इकठ्ठा करने में लगा था मैं उन बच्चपन की यादों को... उन खिलखिलाते लम्हों को उन किस्सों और वादों को... इतने सपने जो सब अपने कुछ अपने उन यारों को... वो शोरगुल हल्लागुल्ला मेलजोल जो होता उन तीज त्योहारों को... चलते थे जो छप छप करते उस सावन की बरसातों को... कुछ हंसाती कुछ रुलाती उन हसीन बच्चपन की सौगातों को... इकठ्ठा करने में लगा था मैं उन बच्चपन की यादों को....!!! - विपुल मिश्रा :) :)
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